हर साल दुनिया भर में इंटरनेट बंद किए जाने की हजारों घटनाएं सामने आती हैं, जो प्रेस की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी और सूचना के अधिकार के लिए एक बड़ा खतरा हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए, सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर (SFLC) के साथ मिलकर रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) ने एक शैक्षणिक वीडियो तैयार किया है। इसके साथ कुछ व्यावहारिक सुझाव भी दिए गए हैं, ताकि पत्रकार ऐसे हालात में बेहतर तरीके से काम कर सकें और इंटरनेट बंद होने के बावजूद लोगों तक जरूरी जानकारी पहुंचाना जारी रख सकें।
वीडियो
ईरान में, इंटरनेट की पहुंच पर भारी प्रतिबंध लगाए गए हैं और कुछ मामलों में कई महीनों तक इसे पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। इससे सूचना का एक तरह का खालीपन पैदा हो गया है और पत्रकारों के लिए घटनाओं को कवर करना मुश्किल हो गया है—खासकर फरवरी के अंत में शुरू हुए अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद से।
पिछले कुछ महीनों में कई अन्य देशों में भी बड़े पैमाने पर इंटरनेट शटडाउन देखने को मिले हैं। 2025 के अंत में तालिबान ने अफगानिस्तान में देशव्यापी इंटरनेट शटडाउन का आदेश दिया। श्रीलंका में 2024 में पाबंदियां और कड़ी कर दी गई। नेपाल ने सितंबर 2025 में 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर रोक लगा दी, जिससे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए और आखिरकार सरकार गिर गई। वहीं, अक्टूबर 2025 के चुनावों के दौरान कैमरून और तंजानिया में भी इंटरनेट सेवाएं काफी प्रभावित रही।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, जिसने पिछले दो वर्षों में 54 देशों में सरकार द्वारा लगाए गए 300 से अधिक इंटरनेट शटडाउन दर्ज किए हैं, इस तरह के कदम सीधे तौर पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिकों के सूचना के मौलिक अधिकार को खतरे में डालती हैं।
ये डिजिटल रुकावटें—चाहे पूरी तरह इंटरनेट बंद करना हो, आंशिक पाबंदियां हो, नेटवर्क को धीमा कर देना (कई बार 2G तक) या खास प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक करना—ऑनलाइन मीडिया को बुरी तरह प्रभावित करती हैं। इससे जानकारी का प्रवाह रुक जाता है और आम लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाती है। खासकर वे पत्रकार जो दूर से या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए काम करते हैं, ऐसे हालात में सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। इसका असर सिर्फ तकनीकी दिक्कत तक सीमित नहीं रहता, बल्कि रिपोर्टिंग में रुकावट, आर्थिक नुकसान और जरूरी सेवाओं तक पहुंच में बाधा जैसे गंभीर परिणाम भी सामने आते हैं।
भाग 1 – इंटरनेट शटडाउन की प्रक्रिया को समझना
1. आधिकारिक आदेश जारी करना
कोई सरकारी प्राधिकरण (राज्य या केंद्र) एक आदेश जारी करता है, जिसमें आमतौर पर ये बातें तय होती हैं:
- किस कानून या नियम के तहत यह फैसला लिया गया है
- इसका आधिकारिक कारण (अक्सर “कानून-व्यवस्था बनाए रखने” या सुरक्षा से जुड़ा होता है)
- किस इलाके में यह लागू होगा (शहर, जिला या पूरा क्षेत्र)।
2. ऑपरेटरों द्वारा लागू करना
इंटरनेट सेवा देने वाली कंपनियां और टेलीकॉम ऑपरेटर्स इस आदेश को लागू करते हैं। इसके लिए कई तरह के तकनीकी कदम उठाए जाते हैं, जैसे:
- मोबाइल डेटा को पूरी तरह बंद कर देना
- इंटरनेट की स्पीड को बहुत धीमा कर देना (थ्रॉटलिंग), जिससे जानकारी साझा करना या काम करना लगभग नामुमकिन हो जाता है
- कुछ खास वेबसाइट्स, मैसेजिंग ऐप्स या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक करना, जिससे पत्रकारों के लिए अपने स्रोतों और आम लोगों से संपर्क करना मुश्किल हो जाता है। कई बार कुछ पब्लिक VPN भी बंद कर दिए जाते हैं।
3. अवधि और विस्तार
- शुरुआत में ये कदम अस्थायी बताए जाते हैं, लेकिन नए आदेशों के ज़रिए इन्हें बार-बार बढ़ाया जा सकता है, जो कई हफ्तों या महीनों तक चल सकता है।
- ऐसे में एक अस्थायी शटडाउन धीरे-धीरे लंबी रुकावट में बदल जाता है, जिसका असर मीडिया, कारोबार और आम नागरिकों पर और ज्यादा गहरा पड़ता है।
भाग 2 – पत्रकारों के लिए व्यावहारिक सुझाव
1. इंटरनेट शटडाउन से पहले
- ऑफलाइन टूल्स तैयार रखें और संवेदनशील दस्तावेजों को सुरक्षित (एन्क्रिप्ट) करें।
- अपनी टीम और स्रोतों से संपर्क के वैकल्पिक तरीके पहले से तय कर लें (फोन, रेडियो, सैटेलाइट)।
- एक बैकअप फोन रखें, जिसमें कोई संवेदनशील जानकारी न हो।
- VPN पहले से इंस्टॉल कर लें।
2. शटडाउन या धीमे नेटवर्क के दौरान
- यह समझने की कोशिश करें कि शटडाउन किस तरह का है: सिर्फ स्पीड कम की गई है, आंशिक बंद है या पूरी तरह इंटरनेट बंद है।
- हर घटना का रिकॉर्ड रखें: कितनी देर तक बंद रहा, किस इलाके में असर पड़ा, और इससे आपके काम व सुरक्षा पर क्या असर हुआ।
- OONI नाम का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अपनी OONI Probe ऐप के जरिए ब्लॉक्स को आसानी से दर्ज करने में मदद करता है।
- अगर सीमित इंटरनेट चल रहा है, तो जरूरी जानकारी को प्राथमिकता दें। फाइल साइज छोटा रखें और वीडियो या वीडियो कॉल से बचें।
- जहां संभव हो, ऐप्स में “लाइट” या डेटा सेविंग मोड का इस्तेमाल करें।
- जिन ऐप्स को बंदी लगाने वाली सरकार सुझाए, उन्हें इंस्टॉल करने से बचें, क्योंकि वे निगरानी का साधन हो सकते हैं।
उदाहरण के तौर पर, रूस में ज्यादातर मैसेजिंग ऐप्स बंद है, सिवाय “Max” के, जिसे सरकार का समर्थन प्राप्त है।
अगर कोई ऐप इंस्टॉल करना जरूरी हो, तो उसे एक अलग डिवाइस में इस्तेमाल करें, ताकि जोखिम कम हो सके।
- नेटवर्क की स्थिति पर नजर रखें: कनेक्टिविटी समय-समय पर जांचते रहें और यह समझते रहें कि कहां और कैसे ब्लॉक लगे हैं, क्योंकि ये जगह के हिसाब से बदल सकते हैं।
- अपने काम का नियमित बैकअप लेते रहें: तैयार की गई हर सामग्री की कम से कम एक कॉपी सुरक्षित रखें।
अधिक जानकारी के लिए – भारत विशेष लेख देखें:
“भारत में इंटरनेट शटडाउन: पत्रकारों के लिए जोखिम और व्यावहारिक गाइड।” (“Internet Shutdowns in India: Risks and Practical Guide for Journalists.”)
इंडिया टूलबॉक्स देखें।